फसल अवशेष जलाने पर हो सकती है सख्त कार्यवाही
Reporter: हरियाणा जनसंपर्क
फसल अवशेष जलाने पर हो सकती है सख्त कार्यवाही
Posted On:
24 Sep 2026 1:13PM
फसलों के अवशेष जलाने वालों को जमीन की उर्वरा शक्ति घटने के साथ साथ सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को खेती से संबंधित योजनाओं के लाभ के लिए ब्लॉक कर दिया जाएगा। यही नहीं, ऐसे मामलों में दोषी एक साल तक सरकारी खरीद यानी एमएसपी पर फसल भी नहीं बेच पाएगा। फसल अवशेष आगजनी को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जिला उपायुक्तों के साथ वीसी कर स्थिति का जायजा लिया।वीसी के बाद उपायुक्त मनदीप कौर ने संबंधित अधिकारियों की बैठक ली और कहा कि फसल अवशेष जलाने के नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक करें। इस बारे में सरकार द्वारा बनाए गए कानून एवं नियमों से किसानों को अवगत करवाएं। किसानों को बताएं कि फसल अवशेष जलाने पर उनके खेत की जमीन की उत्पादन क्षमता घटती जा रही है। इसका उन्हें व्यक्तिगत नुकसान है। साथ ही सरकार के नियम कानून के अनुसार अगर फसल के अवशेष जलाए जाते हैं तो संबंधित के रिकार्ड में रेड एंट्री होगी और उसके बाद सबंधित किसान एक साल तक सरकारी खरीद के दौरान अपनी फसल नहीं बेच पाएगा। यही नहीं उसे खेती से संबंधित योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ भी नहीं मिलेंगे।उन्होंने जिला के किसानों का आह्वान किया है कि वे फसल कटाई के उपरांत फसल अवशेषों को आग न लगाए। किसान फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करें। फसल अवशेष जलाना वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है। जिला प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत पहले ही प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर किसानों को अवगत एवं सचेत किया जाता रहा है।फसल अवशेष के बेहतर प्रबंधन के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाए। इन उपायों में फसल अवशेषों से कम्पोस्ट या जैविक खाद बनाना, पशु चारे के रूप में उपयोग, मल्चिंग के माध्यम से नमी संरक्षण तथा रोटावेटर, हैप्पी सीडर, रिवर्स प्लॉउ एवं मल्चर जैसे कृषि यंत्रों (जो कि कृषि विभाग द्वारा अनुदान पर भी दिए जाते है) से अवशेष को मिट्टी में मिलाना शामिल हंै। सभी किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें तथा उन्हें आग न लगाए। फसल अवशेष जलाने पर 2500 रुपए से 15000 रुपए तक का जुर्माना एवं पुलिस कार्रवाई का भी प्रावधान है। फसल अवशेषों की निगरानी के लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग एवं पुलिस विभाग (माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशो पर) की संयुक्त टीमो का गठन भी कर दिया गया है।
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(Release ID: 7139)